कर्ज़ लेकर घी पीने का उदाहरण हैं मध्यप्रदेश के मंत्रियों के बंगले


दोनों ही सरकारों में मंत्री बने जन प्रतिनिधियों के बंगलों पर जो रकम खर्च की गई,उससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सौ से ज्यादा मकान बनाए जा सकते थे.

Source: News18 Madhya Pradesh
Last updated on: February 26, 2021, 5:01 PM IST

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मध्यप्रदेश सरकार (MP Government) पर कर्ज का भार लगातार बढ़ता जा रहा है. लेकिन,सरकार के खर्चों में कोई कमी देखने नहीं मिल रही है. पिछले साल मार्च कोरोना संक्रमण (Corona) के कारण राज्य की आय पर प्रभाव पड़ा है.इसके बाद भी सरकार मंत्रियों के बंगलों के नवीनीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं. एक तरफ सरकार जरूरी खर्चे चलाने के लिए कर्ज ले रही थी,दूसरी और यह राशि जनहित के कार्यो के बजाए मंत्रियों के बंगलों को आलीशान रूप देने पर खर्च की जा रही थी.कर्ज लेकर घी पीने वाली कहावत यहां चरित्रार्थ होती दिखी.राज्य में दो साल के भीतर दो सरकारें आईं. दोनों ही सरकारों में मंत्री बने जन प्रतिनिधियों के बंगलों पर जो रकम खर्च की गई,उससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सौ से ज्यादा मकान बनाए जा सकते थे.मध्यप्रदेश में यह देखा गया है कि जब भी सरकार बदलती है,बंगले के रिनोवेशन पर खर्च बढ़ जाता है. बंगले का रिनोवेशन मंत्रियों से ज्यादा अफसरों की दिलचस्पी का विषय रहता है.

कोरोना काल में सरकार ने लिया 23 हजार करोड़ का कर्ज
ग्यारह माह के कोरोना काल में मध्यप्रदेश सरकार ने 23 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया है.सरकार पर वर्तमान में बाजार का कुल 2 लाख 11 हजार 89 करोड़ से ज्यादा का कर्ज हो चुका है.साल 2018 के अंत में यह कर्ज 1 लाख 80 हजार करोड़ था.पिछले साल मार्च में शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने से पहले कमलनाथ भी कर्ज लेकर सरकार चला रहे थे.कमलनाथ लगातार आरोप लगाते रहे कि शिवराज सिंह चौहान ने दिसंबर 2018 में उन्हें सरकार का खाली खजाना सौंपा था. किसानों की कर्जमुक्ति न कर पाने की वजह भी कमलनाथ खाली खजाना बताते रहे. मध्य प्रदेश में इस समय पेट्रोल और डीजल पर देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा सबसे ज्यादा टैक्स सरकार की ओर से वसूला जा रहा है.

कोरोना के कारण विभागों को नहीं थी बजट खर्च की अनुमति

कोरोना के लॉकडाउन से पहले राज्य में कांग्रेस विधायकों के सामूहिक इस्तीफे के कारण कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी.सरकार ने महामारी से निपटने में आने वाले खर्च को देखते हुए सभी खर्चों पर रोक लगा दी थी.कर्मचारियों के एक दिन के वेतन की कटौती का आदेश भी दिया गया था. कोरोना से पीड़ित लोगों के इलाज पर सात करोड़ रुपये से अधिक का खर्च सरकार ने किया. पौने दो सौ करोड़ रूपये का काढ़ा बांटा गया.

कॉर्पोरेट लुक वाला है PWD मंत्री का स्वागत कक्ष
राज्य में सरकारी बंगलों के रखरखाव का काम लोक निर्माण विभाग करता है. लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव हैं. वे पिछले सत्रह साल से चौहत्तर बंगला इलाके के जिस बंगले पर रहते हैं,उस पर एक साल में सबसे ज्यादा राशि रिनोवेशन मद से खर्च की गई है. राज्य विधानसभा में विभाग की ओर से जानकारी दी गई उसके अनुसार 56 लाख 12 हजार रूपए पिछले दस माह में खर्च किए गए हैं. मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्रियों के बंगले के रिनोवेशन पर दस माह में साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है. लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने अपने बंगले के परिसर में कॉर्पोरेट लुक वाला नया स्वागत कक्ष बनवाया है.स्टाफ के बैठने की व्यवस्था भी यहीं की गई है.बंगलों के रेनोवेशन में वास्तु का टोटका
कमलनाथ दिसंबर 2018 में राज्य के मुख्यमंत्री बने थे.वे अगस्त 2019 में मुख्यमंत्री निवास में रहने के लिए गए थे.लोक निर्माण विभाग ने कमलनाथ की सुविधा के अनुसार बंगलें में कुछ रेनोवशन किया था.सीएम हाउस में मुख्यमंत्री के कमलनाथ के कक्ष से सटा हुआ एक स्टाफ कक्ष बनाया गया.इसके अलावा सचिव और सहायकों के लिए अलग कैबिन बनाए गए हैं.वहीं 75 लोगों की क्षमता वाला नया मीटिंग हॉल बनाया गया. सीएम हाउस में प्रमुख सचिव, सचिव के साथ एसपी, ओएसडी के भी कैबिन अलग से बनाए गए.वीडियो सर्विलांस सुविधा के साथ सिक्योरिटी ऑफिस और रूम बनाया गया है.शिवराज सिंह चौहान ने तेरह साल तक कोई बदलाव नहीं किया था.पंद्रह माह में ही कमलनाथ के हाथ से सत्ता निकल जाने का दोष सरकारी बंगले में हुए बदलाव के खाते में भी गया. इसी तरह की चर्चा तब भी चली थी जब उमा भारती और बाबूलाल गौर जब सीएम पद पर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे.जबकि शिवराज सिंह चौहान के लिए यह बंगला बेहद लकी माना गया. चौहान के दोनों सरकारी बंगलों पर 31 लाख रुपये के रिनोवेशन कार्य पिछले दस माह में कराए गए.

यशोधरा राजे सिंधिया के बंगले पर नाममात्र का खर्च
राज्य की खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के सरकारी बंगले के रखरखाव में सबसे कम 1495 रुपये की राशि ही खर्च हुई.खेल मंत्री सिंधिया रहती भी छोटे बंगले में हैं. जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के आवास पर 3,145 और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी राज्यमंत्री बृजेंद्र सिंह यादव के आवास पर 6,996 रुपये व्यय हुए.राज्य के लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव कहते हैं कि सरकारी बंगलों का रखरखाव न किया जाए तो वे सुरक्षित नहीं रह सकते.(डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं)


ब्लॉगर के बारे में

दिनेश गुप्ता

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं. देश के तमाम बड़े संस्थानों के साथ आपका जुड़ाव रहा है.

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First published: February 26, 2021, 4:56 PM IST





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Author: riteshkucc01

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