अमर उजाला विशेष: सर्जरी ब्लॉक में दिव्यांगों के लिए रास्ता बनाना भूला एम्स


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मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली एम्स में लंबे समय से सर्जरी ब्लॉक का निर्माण चल रहा है लेकिन इमारत बनने के बावजूद अब तक यह मरीजों के लिए शुरू नहीं हो सका। हाल ही में पता चला कि इमारत बनाने के बाद दिव्यांगों के लिए रास्ता बनाना ही भूल गए। इतना ही नहीं सर्जरी ब्लॉक में लिफ्ट का काम भी लंबित पड़ा है। इन्हीं के चलते हर बार सर्जरी ब्लॉक के शुरू करने का समय आगे बढ़ रहा है। कोरोना महामारी के चलते एम्स के कई प्रोजेक्ट में देरी आई है लेकिन सर्जरी ब्लॉक का काम कई साल देरी से चल रहा है।

दिल्ली एम्स प्रबंधन के ही सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्रालय से सर्जिकल ब्लॉक को प्रमुखता के तौर पर शुरू करने का आदेश मिलने के बाद भी रफ्तार मंद है। अगर यह ब्लॉक समय पर शुरू होता तो एम्स में न सिर्फ ऑपरेशन की वेटिंग कम होती बल्कि प्रत्यारोपण को लेकर भी काफी लाभ मिल पाता। किडनी प्रत्यारोपण को लेकर ही बात करें तो एम्स में अभी 18 महीने तक की वेटिंग है लेकिन नया ब्लॉक शुरू होने से ऑपरेशन थियेटर की कमी दूर होगी और इसका सीधा असर वेटिंग पर पड़ेगा। इसके अलावा अन्य सर्जरी के लिए भी मरीजों को कई महीने बाद की तारीख दी जाती है। इससे मरीजों को इलाज के लिए भटकने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता।

जानकारी के अनुसार साल 2014 फरवरी में सर्जरी ब्लॉक की आधारशिला रखी गई थी। इसी दौरान एम्स के परिसर में मातृ और शिशु ब्लॉक भी बनाने का काम शुरू हो चुका था। गौर करने वाली बात है कि साल 2015 तक निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 2016 तक मरीजों के लिए इसकी सेवा मिलना थी लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी अब तक यह इमारत प्रबंधन को नहीं मिल पाई है। सर्जिकल ब्लॉक का नौ मंजिला भवन करीब दो साल से बनकर तैयार है, लेकिन पहले विभागीय अड़चन, फिर मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर और अब दिव्यांगों के लिए अलग से रास्ता नहीं बनने की वजह से दिक्कतें आ रही हैं। 

दिल्ली एम्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 17 हजार वर्गमीटर में फैला सर्जरी ब्लॉक 200 बिस्तर और 12 ऑपरेशन थियेटर की क्षमता रखता है। इसमें अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर ऑपरेशन थियेटर बनाए हैं। मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर का काम पिछले दो साल से चल रहा है। इतना ही नहीं इस ब्लॉक में नेशनल एंडोस्कोपी सेंटर भी शुरू किया जाएगथा। इसके अलावा प्रत्यारोपण के लिए अलग यूनिट होगी। ऐसे में जाहिर है कि इस प्रोजेक्ट का कितना जल्दी पूरा होना जरूरी है? बहरहाल इस मामले को लेकर जब एम्स प्रबंधन से आधिकारिक जानकारी मांगी गई तो जवाब नहीं मिल सका। एम्स के सर्जरी विभाग में कई वरिष्ठ डॉक्टर लंबे समय से इस ब्लॉक का इंतजार कर रहे थे। वर्तमान में ये अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं लेकिन एम्स का सर्जरी ब्लॉक अभी भी प्रबंधन से दूर है। 

आठ ऑपरेशन थियेटर फिर से बने
जानकारी के अनुसार सर्जरी ब्लॉक में 12 ऑपरेशन थियेटर बनाए गए लेकिन अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल न होने की वजह से एम्स प्रबंधन को फिर से यहां ऑपरेशन थियेटर बनवाने पड़े। करीब आठ ऑपरेशन थियेटर को मॉड्यूलर तकनीक का प्रयोग करते हुए बनाया गया। इस कार्य में करीब छह से सात महीने का वक्त लग गया। 

मास्टर प्लान में दो ब्लॉक ही बचे
दिल्ली एम्स धीरे धीरे विश्वविद्यालय बनने की राह पर है। इसके लिए एम्स नए मास्टर प्लान पर काम कर रहा है। इसके तहत नई ओपीडी ब्लॉक और बर्न व प्लास्टिक सर्जरी का ब्लॉक अब तक शुरू हो चुका है। इसके अलावा विश्राम सदन भी शुरू है लेकिन मातृ शिशु और सर्जरी ब्लॉक का इंतजार है। वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अलग से जीरिएट्रिक ब्लॉक बन रहा है लेकिन इससे कई साल पहले शुरू हुए प्रोजेक्ट अब तक लंबित पड़े हैं। 

मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली एम्स में लंबे समय से सर्जरी ब्लॉक का निर्माण चल रहा है लेकिन इमारत बनने के बावजूद अब तक यह मरीजों के लिए शुरू नहीं हो सका। हाल ही में पता चला कि इमारत बनाने के बाद दिव्यांगों के लिए रास्ता बनाना ही भूल गए। इतना ही नहीं सर्जरी ब्लॉक में लिफ्ट का काम भी लंबित पड़ा है। इन्हीं के चलते हर बार सर्जरी ब्लॉक के शुरू करने का समय आगे बढ़ रहा है। कोरोना महामारी के चलते एम्स के कई प्रोजेक्ट में देरी आई है लेकिन सर्जरी ब्लॉक का काम कई साल देरी से चल रहा है।

दिल्ली एम्स प्रबंधन के ही सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्रालय से सर्जिकल ब्लॉक को प्रमुखता के तौर पर शुरू करने का आदेश मिलने के बाद भी रफ्तार मंद है। अगर यह ब्लॉक समय पर शुरू होता तो एम्स में न सिर्फ ऑपरेशन की वेटिंग कम होती बल्कि प्रत्यारोपण को लेकर भी काफी लाभ मिल पाता। किडनी प्रत्यारोपण को लेकर ही बात करें तो एम्स में अभी 18 महीने तक की वेटिंग है लेकिन नया ब्लॉक शुरू होने से ऑपरेशन थियेटर की कमी दूर होगी और इसका सीधा असर वेटिंग पर पड़ेगा। इसके अलावा अन्य सर्जरी के लिए भी मरीजों को कई महीने बाद की तारीख दी जाती है। इससे मरीजों को इलाज के लिए भटकने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता।

जानकारी के अनुसार साल 2014 फरवरी में सर्जरी ब्लॉक की आधारशिला रखी गई थी। इसी दौरान एम्स के परिसर में मातृ और शिशु ब्लॉक भी बनाने का काम शुरू हो चुका था। गौर करने वाली बात है कि साल 2015 तक निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 2016 तक मरीजों के लिए इसकी सेवा मिलना थी लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी अब तक यह इमारत प्रबंधन को नहीं मिल पाई है। सर्जिकल ब्लॉक का नौ मंजिला भवन करीब दो साल से बनकर तैयार है, लेकिन पहले विभागीय अड़चन, फिर मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर और अब दिव्यांगों के लिए अलग से रास्ता नहीं बनने की वजह से दिक्कतें आ रही हैं। 

दिल्ली एम्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 17 हजार वर्गमीटर में फैला सर्जरी ब्लॉक 200 बिस्तर और 12 ऑपरेशन थियेटर की क्षमता रखता है। इसमें अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर ऑपरेशन थियेटर बनाए हैं। मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर का काम पिछले दो साल से चल रहा है। इतना ही नहीं इस ब्लॉक में नेशनल एंडोस्कोपी सेंटर भी शुरू किया जाएगथा। इसके अलावा प्रत्यारोपण के लिए अलग यूनिट होगी। ऐसे में जाहिर है कि इस प्रोजेक्ट का कितना जल्दी पूरा होना जरूरी है? बहरहाल इस मामले को लेकर जब एम्स प्रबंधन से आधिकारिक जानकारी मांगी गई तो जवाब नहीं मिल सका। एम्स के सर्जरी विभाग में कई वरिष्ठ डॉक्टर लंबे समय से इस ब्लॉक का इंतजार कर रहे थे। वर्तमान में ये अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं लेकिन एम्स का सर्जरी ब्लॉक अभी भी प्रबंधन से दूर है। 

आठ ऑपरेशन थियेटर फिर से बने

जानकारी के अनुसार सर्जरी ब्लॉक में 12 ऑपरेशन थियेटर बनाए गए लेकिन अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल न होने की वजह से एम्स प्रबंधन को फिर से यहां ऑपरेशन थियेटर बनवाने पड़े। करीब आठ ऑपरेशन थियेटर को मॉड्यूलर तकनीक का प्रयोग करते हुए बनाया गया। इस कार्य में करीब छह से सात महीने का वक्त लग गया। 

मास्टर प्लान में दो ब्लॉक ही बचे

दिल्ली एम्स धीरे धीरे विश्वविद्यालय बनने की राह पर है। इसके लिए एम्स नए मास्टर प्लान पर काम कर रहा है। इसके तहत नई ओपीडी ब्लॉक और बर्न व प्लास्टिक सर्जरी का ब्लॉक अब तक शुरू हो चुका है। इसके अलावा विश्राम सदन भी शुरू है लेकिन मातृ शिशु और सर्जरी ब्लॉक का इंतजार है। वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अलग से जीरिएट्रिक ब्लॉक बन रहा है लेकिन इससे कई साल पहले शुरू हुए प्रोजेक्ट अब तक लंबित पड़े हैं। 



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Author: riteshkucc01

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